जन्म और बचपन – जगद्गुरु श्री स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज का
Birth and Childhood of Jagadguru Shankaracharya Swami Sri Swaroopananda Saraswati Ji Maharaj
पूज्य गुरुदेव प्राकट्य जन्मतिथि महोत्सव – 2026 🌺

नमो नारायण!
समस्त गुरुभक्तों के लिए यह अत्यंत हर्ष और आनंद का विषय है कि इस वर्ष 2026 में पूज्य गुरुदेव का प्राकट्य जन्मतिथि महोत्सव अति शुभ संयोग में आ रहा है। तिथि एवं शुभ मुहूर्त तारीख, तिथि और नक्षत्र के अनुसार पूर्ण विवरण नीचे दिया गया है:

जन्मतिथि तिथि एवं शुभ मुहूर्त (Date of Birth & Panchang Details):

  • अंग्रेज़ी कैलेंडर : 2 सितंबर 1924,
  • मास (महीना): भाद्रपद मास
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • तिथि: तृतीया
  • नक्षत्र: हस्त नक्षत्र
  • राशि : कन्या,
  • समय : रात 9:00 बजे
  • ऋतु: शरद ऋतु
  • संवत्सर (Samvatsara):
    • उत्तर भारत अनुसार: धाता संवत्सर
    • दक्षिण भारत अनुसार: रक्ताक्षी संवत्सर

शुभ संयोग (Auspicious Conjunction):

अंग्रेज़ी कैलेंडर के अनुसार पूज्य गुरुदेव का जन्म 2 सितंबर 1924 को हुआ था। शास्त्रोक्त पंचांग के अनुसार इस वर्ष 2026 में भाद्रपद शुक्ल तृतीया तथा हस्त नक्षत्र का पावन योग 13 सितंबर 2026 को बन रहा है।
आइए, इस पावन अवसर पर गुरुदेव के चरणों में नमन करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें!

Pujya Gurudev Prakatya Janmatithi Mahotsav – 2026

Jai Shree Ram / Namo Narayan! 🙏
It is a matter of immense joy and devotion for all devotees that this year in 2026, Pujya Gurudev’s Prakatya Janmatithi Mahotsav will be celebrated under most auspicious planetary alignments.

Here are the complete date and Panchang details for easy reference:
Auspicious Schedule & Panchang Details:

  • Gregorian Original Birth Date: September 2, 1924
  • Time : 9.00 p.m
  • Hindu Month: Bhadrapada
  • Paksha (Fortnight): Shukla Paksha
  • Tithi (Lunar Day): Tritiya
  • Nakshatra (Birth Star): Hasta Nakshatra
  • Rasi : Kanya ,
  • Rutu (Season): Sharad Rutu
  • Samvatsara (Year Name):
    • North India: Dhata Nama Samvatsara
    • South India: Raktakshi Nama Samvatsara

This Year 2026 : Auspicious Conjunction: : As per the Hindu Panchang, the divine alignment of Bhadrapada Shukla Tritiya along with Hasta Nakshatra falls on September 13, 2026.

Let us all come together on this holy day to seek Pujya Gurudev’s divine blessings!

Date
तारीख
Event
कार्यक्रम
details
विवरण
Place
स्थान
English Calander :
2 Sept 1924
2 सितंबर 1924
Vedic Thithi
Birth Date . Tithi
जन्म तिथि
“Dhatri” Nama Samvatsara
Bhadrapada Shukla Truteeyaa

“धात्री” नाम संवत्सर
भाद्रपद शुक्ल तृतीया
Dhigori ( Seoni District ) M.P

दिघोरी (गुरूधाम), सिवनी
Childhood Name – Pothiram Upadhyay

बचपन का नाम – पोथीराम उपाध्याय
Nakshatram “Hasta”Dakshinayane
Sharad rutu
 1933Childhood Dhigori School  
Parents Sri Dhanpati Upadhyaya,
Smt.Girija Devi
 Tapasya Jhoteshwar Paramahamsi Ganga Ashram  
 Bramhacnari   Kashi Dharma Sangh 
 EducationTreditional Education from Sri Brahmananda Saraswari,

Sri Vidya :
Sri Hariharananda Saraswati (Sri Karapatriji )
Dharma Sangh 
 Sanyasi Sri Brahmananda Saraswati Ji Badari JyotirmathKolkatta  
1943  Swatantra Sangrama
( At the age of 19 )
 Varanasi  
 Gow Seva Andolan Kolkatta  
 7 Dec 1973Jyotirmath Abhishekam 46th Shankaracharya of Jyotirmath  
27 May 1982As a Dwaraka Shankaracharya 78th Shankarachaya
Historical Events at the age of 19the Participation in India Freedom Movement ,

‘Quit India’ movement (1942)

Cow Protection,

Renovations of Sri Govindanatha Van , Sanyasi Sthal of Sri Adi Shankaracharya ,

Chatushpeetha Samelanam in Kalati, Prayagraj, Sringeri, Bangaloree,

Sri Rama Setu Andolan,

Sri Rama Janmabhoomi Andolan,

Vedic Gurukulam in Varanasi, Jabalpur, Jhoteshwar, Dwaraka,

Renovations of Adi Shankarachaya Nirvana Sthal in Kedarnath ,
 (Serving two prison sentences for same of 9 months & 6 months). for Cow Protection and ‘Quit India’ movement (1942)
    
 11-09-2022 Brahmalena
(Samadhi)
  Jhoteshwar –
Narasingpur District (M.P)
 Paramahamsi Ganga Ashram  

Jagadguru Shankaracharya Swami Sri Swaroopananda Saraswati Ji
Birth Date Tithi :
“Dhatri Year – Bhadra Month -Shukla Paksha Truteeya Tithi “
“धात्री वर्ष – भाद्र मास – शुक्ल पक्ष – तृतीया तिथि”
( 2 Sept 1924) According to that
Upcommig Date : 13 Sept 2026


तत्कालीन पूज्य द्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगद्‌गुरु शंकराचार्य द्वारा महाराज श्री के ज्योतिष्पीठाधीश्वर अभिषिक्त होने का
घोषणा पत्र श्रीद्वारका-शारदापीठ द्वारका (सौराष्ट्र)

दिनांक: 7/12/1973 मुकाम देहली

हम प्रसन्नतापूर्वक सोत्साह यह घोषणा करते हैं कि ब्रह्मीभूत श्री ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्‌गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री ब्रह्मानन्द सरस्वती महाराज के वरिष्ठतम एवं योग्य शिष्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी  महाराज जिनमें आदि शंकराचार्य जी के महानुशासन और मठाम्नाय के अनुसार जगद्‌गुरु शंकराचार्य होने की पूर्ण योग्यताएं हैं… काशी विद्वत्परिषद् के प्रस्ताव दि. वामन द्वादशी ता. 9/9/1973, द्वितीय प्रस्ताव 12/9/1973 के अनुसार एवं ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी
श्री कृष्णबोधाश्रम महाराज का सुझाव भी एतदर्थ संप्राप्त है। इसके पट्टाभिषेक के प्रस्ताव पर हम स्वयं इन्हें जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर के रूप में स्वीकार करते हैं।

आज से ज्योतिष्पीठाधीश्वर क्षेत्र में क्षेत्र की जनता परमपूज्य आचार्य के रूप में माने और उपदेशादि ग्रहण करें। इस निर्वाचन में हम और शृङ्गेरीपीठाधीश्वर जगद्‌गुरु शंकराचार्य भी उत्साहपूर्वक सक्रिय भाग ले रहे हैं एवं स्वीकृत किया है।

हस्ताक्षर :
श्री अभिनव सच्चिदानन्द तीर्थ स्वामिनः (द्वारका-शारदापीठ की मुहर)

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तत्कालीन गोवर्धनपीठाधीश्वर जगद्‌गुरु शंकराचार्य द्वारा महाराज श्री के ज्योतिष्पीठाधीश्वर अभिषिक्त होने का
 घोषणा पत्र

।। श्रीहरिः ।।
अनन्तश्री जगद्‌गुरु शंकराचार्य श्रीनिरंजनदेव तीर्थ जी महाराज
गोवर्धनमठ, पुरी (उड़ीसा)

हम प्रसन्नतापूर्वक घोषणा करते हैं कि ब्रह्मलीन ज्योतिष्पीठाधीश्वर स्वामी श्री ब्रह्मनन्द सरस्वती जी महाराज के वरिष्ठतम सुयोग्य शिष्य श्री स्वरूपानन्द सरस्वती आदि शंकराचार्य के ‘मठाम्नाय और महानुशासन’ के अनुसार जगद्‌गुरु शंकराचार्य बनने की समस्त योग्यताएं रखते हैं। इसी कारण धर्म-परिषद ने भी वामन द्वादशी दिनांक 1973 को प्रस्ताव द्वारा इन्हीं स्वामी स्वरूपानन्द जी महाराज की इस पद के योग्य निश्चित किया एवं ब्रह्मलीन जगद्‌गुरु शंकराचार्य जी ने भी इस प्रस्ताव का अनुमोदन किया।

इसी कारण दिल्ली में आयोजित पट्टाभिषेक श्री द्वारका शारदापीठाधीश्वर स्वामी अभिनव सच्चिदानन्द तीर्थ महाराज तथा श्रृंगेरी पीठ प्रतिनिधि और श्रीमुख तथा हमारे सहयोग से सम्पन्न हुआ। अतः हम सभी स्वामी श्रीस्वरूपानन्द सरस्वती को ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य के रूप में स्वीकार करते हैं, तथा ज्योतिष्पीठ क्षेत्र की समस्त जनता को परामर्श देते हैं कि उन्हें परमपूज्य आचार्य रूप में मानकर इनके पावन उपदेशादि ग्रहण करें। शम्

हस्ताक्षर :
(मुहर) अनन्तश्री जगद्‌गुरु शंकराचार्य
श्री निरंजनदेव तीर्थ जी महाराज, गोवर्धनमठ, पुरी (उड़ीसा)